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किसान को कृष्ण मानने से क्या होगा?

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                'कृष्ण' का शाब्दिक अर्थ और        कृष्ण के कर्म-जीवन का निहितार्थ                                 प्रस्तुति: डॉ मलखानसिंह, पूर्व प्राचार्य           'कृष्ण' शब्द संस्कृत की कृष् धातु से बना है. कृष् धातु के माने हल खीचना. अर्थात हल चलाने वाली कृषि संस्कृति में कृष्ण का जन्म होता है. इसीलिए उनके बड़े भाई हलधर भी कहे जाते हैं. हलधर व कृष्ण दोनों कृषि, कृषक व कृषि-संस्कृति से संबंधित हैं. गौ पालन व गौ से उत्पन्न बछड़े खेती-किसानी में सहायक होते थे।         कर्षण, आकर्षण, विकर्षण, अपकर्षण सभी कृष् धातु से व्युत्पन्न हैं।      वास्तव में कृष्ण कृषि संस्कृति के वाहक हैं। खेतिहर कबीलाई समुदाय ही सामाजिक आर्थिक संरचना में गणराष्ट्र की राजनीतिक प्रणाली के वाहक थे. उस समय राज्य, राजा का उदय नहीं था. एक मात्र राजनीतिक प्रणाली गणराष्ट्र कही जाती थी जो सामूहिक स्वामित्व की आदिम राजनीतिक प...

कृष्ण और किसान

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                  हाँ, कृष्ण किसान थे ! ...                                                                  यह किसी व्यक्ति का कथन नहीं, यह भाषा विज्ञान कहता है!..किसान शब्द का व्युत्पत्तिगत रूप यही बताता है। अगर नहीं तो आप बताएँ किसान शब्द की व्युत्पत्ति क्या होगी?...कैसे होगी?.. जी, कृषक शब्द से किसान शब्द नहीं बना, नहीं बन सकता!..अगर बन सकता है तो बताइए कैसे?...लेकिन कृष्ण शब्द से किसान बन सकता है, बना है!  यदि निम्न व्युत्पत्ति गलत लगे तो बताइए, कैसे?... कृष्ण---- संस्कृत (वैदिक और लौकिक) ~~~  कृषणा~कृशना (प्राकृत) ~~~ क्रिस्ना~ किसना (अपभ्रंश) ~~~ किसना~ किसन (अवहट्ट~पुरानी हिंदी) ~~~~ किसान (ध्वनि विपर्यय से- हिंदी) जी, ठीक जाना, समझा आपने!.... कृष्ण का मतलब किसान! मान भी लो भाई!..भगवान का दिया खाते हो, कहते हो न! सही कहते हो, किसान ही अन्नदाता है, वही तुम्...